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Mira-भायंदर में नॉन-मराठी ऑटो ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा सीखने की वर्कशॉप

Maharashtra महाराष्ट्र: मीरा-भायंदर क्षेत्र में नॉन-मराठी ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों के लिए एक विशेष मराठी भाषा सीखने की वर्कशॉप का आयोजन किया गया। यह पहल उस रिपोर्ट के बाद शुरू की गई, जिसमें खुलासा हुआ था कि क्षेत्र में काम कर रहे लगभग 565 नॉन-मराठी रिक्शा ड्राइवर स्थानीय मराठी भाषा से परिचित नहीं हैं।
इस स्थिति को देखते हुए राज्य के ट्रांसपोर्ट मंत्री प्रताप सरनाइक ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी नॉन-मराठी ड्राइवरों के लिए 15 अगस्त तक रोजमर्रा की मराठी सीखना अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा तक ड्राइवर भाषा नहीं सीखते हैं, तो उनके परमिट 16 अगस्त से रद्द कर दिए जाएंगे।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य स्थानीय यात्रियों और ऑटो ड्राइवरों के बीच संवाद को आसान बनाना और सेवा की गुणवत्ता में सुधार करना बताया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि भाषा की समझ न होने के कारण कई बार यात्रियों और ड्राइवरों के बीच गलतफहमियां पैदा होती हैं।
इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए ट्रांसपोर्ट मंत्री प्रताप सरनाइक और डिप्टी रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO), मीरा-भायंदर के सहयोग से यह विशेष वर्कशॉप आयोजित की गई। इस कार्यक्रम को एक “इनोवेटिव ट्रेनिंग पहल” के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य ड्राइवरों को बुनियादी मराठी भाषा सिखाना है ताकि वे यात्रियों के साथ बेहतर संवाद स्थापित कर सकें।
मिरा-भाईंदर मधील हिंदी भाषिक रिक्षाचालकांना व्यावहारिक मराठीचे धडे देण्याचा शुभारंभ...
— Pratap Baburao Sarnaik (@PratapSarnaik) May 15, 2026
मराठी भाषा ही महाराष्ट्राच्या संस्कृतीची, अस्मितेची आणि स्वाभिमानाची खरी ओळख!#PratapSarnaik #TransportMinister #Marathi #MarathiAsmita #MiraBhayandar #RickshawDrivers #MarathiBhasha #ShivSena pic.twitter.com/XrWQAbFkCt
इस वर्कशॉप में ठाणे रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर हेमांगिनी पाटिल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान ड्राइवरों को रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले मराठी वाक्य, संवाद और व्यवहारिक शब्दावली सिखाई गई।
अधिकारियों ने बताया कि यह पहल केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसे व्यापक नीति के रूप में लागू करने की दिशा में कदम माना जा रहा है। भविष्य में अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की भाषा प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
इस फैसले को लेकर स्थानीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे यात्रियों की सुविधा और बेहतर सेवाओं की दिशा में एक सकारात्मक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ ड्राइवर संगठनों का कहना है कि भाषा सीखने के लिए दी गई समय सीमा काफी कम है।
फिलहाल प्रशासन ने साफ किया है कि तय समय सीमा का पालन करना अनिवार्य होगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।





